विश्वास, संयम और ईमानदारी की 3 प्रेरणादायक कहानियां

कुछ इमोशनल और मोटिवेशनल स्टोरीज जो मैने सुनी
अभी कुछ दिनों पहले मैने कुछ कहानिया पढी जो बहुत छोटी सी है लेकिन उन कहानियों में छिपी शिक्षा ने मुझे प्रभावित किया है।
हो सकता है कि उन कहानियों मे से कुछ कहानियां आपने पहले से पढ रखी हो क्योकि ये कहानियां कोई आज की लिखी हुई नहीं है लेकिन इन्होने इनके मोरल्स बहुत प्रभावित करने वाले है।

 

3 प्रेरणादायक कहानियां

हाथी की जंजीर

 

 

 

कोई व्यक्ति किसी साधारण सडक से गुजर रहा था। उसकी नजर सडक किनारे लगे एक सर्कस के तम्बूओं पर पडी। उसने वहाॅ कई हाथियो को देखा। हाथीयों को देखकर उसे बहुत आश्चर्य हुआ क्योंकि हाथियों को किसी बडे पिंजरे में रखने के बजाय केवल एक जंजीर से उन्हें बांधकर रखा गया था। वो जंजीर उतनी मजबूत नहीं थी जो हाथियों को सर्कस से भाग जाने से रोक सके। उसे ये देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि हाथी जैसे ताकतवर जीव वहाॅ से भाग जाने के लिये अपनी ताकत का उपयोग क्यों नही करते। वे उन जंजीरों को बहुत आसानी से तोड सकते है। इसके बजाय वे प्रयास भी नही कर रहे है।

वो व्यक्ति अपने आश्चर्य को दूर करने के लिये वो उन हाथियों को सिखाने वाले टेªनर के पास गया पूछा
‘ भाई ये हाथी यहाॅ सिर्फ खडे क्यों हैं? क्या इन हाथीयों ने कभी यहां से भागने की कोशिश नहीं की?
तो उस ट्रेनर ने जवाब दिया

 

“जब ये हाथी छोटे होते हैं तब से उन्हें इसी रस्सी से बाॅध कर रखा जाता है। लेकिन उस समय वो रस्सी उन्हें रोककर रखने के लिये पर्याप्त होती हैै। लेकिन अब जब ये हाथी बडे हो गये है तो भी उन्हें इस बात पर विश्वास हो जाता है कि ये रस्सी उन्हें बाॅधकर रख सकती है और वे कभी भी इस रस्सी को तोडकर भाग नहीं पायेंगे। इसीलिये ये रस्सी मे बंधे हुये है और वे इन्हें तोडने की कोशिश नहीं करते”

 

हाथीयों का इस सर्कस से भागने की कोशिश नहीं करने का कारण यह है कि इन्होने इस बात पर विश्वास कर लिया है कि यहाॅ से भागना इनके लिये असम्भव है।

कहानी की शिक्षाः-

इससे बात से कोई फर्क नहीं पडता कि दुनिया आपको पीछे खींचने की कितनी कोशिश करती है। हमेशा इस बात पर विश्वास करो कि आप सबकुछ कर सकते है। विश्वास ही आपको आपके जीवन में सफल कर सकता है।

 

 

मुश्किल समय में संयम

 

 

सैकडो वर्ष पहले इटली के एक कस्बे में एक छोटे व्यापारी ने एक बहोत बडी रकम कर्ज के रूप में एक साहूकार से ली थी। चूॅकि व्यापारी का व्यापार घाटे में चल रहा था इसलिये वह कर्ज चुकाने की स्थिती में नहीं था।

साहूकार बहुत बूढा और बदसूरत था। वह व्यापारी की सुन्दर बेटी से शादी करना चाहता था।

साहूकार ने व्यापारी को एक प्रस्ताव दिया जिससे व्यापारी का सारा कर्ज चुक जायेगा। साहूकार ने व्यापारी से कहा कि यदि वह अपनी बेटी की शादी उससे करा देगा तो उसका सारा कर्ज माफ हो जायेगा।

कहने की जरूरत नहीं है कि यह प्रस्ताव बहुत घटिया था।

 

साहूकार ने कहा कि वह एक थैले मे दो पत्थर डालेगा जिसमे एक का रंग काला और दूसरे का सफेद होगा।
व्यापारी की बेटी को उस थैले में से किसी एक पत्थर को निकालना होगा।

यदि काले रंग का पत्थर बाहर निकला तो व्यापारी का कर्जा माफ हो जायेगा लेकिन उसकी बेटी का साहूकार से शादी करनी होगी।

यदि सफेद रंग का पत्थर बाहर निकला तो भी साहूकार का कर्ज माफ होगा लेकिन व्यापारी की बेटी को साहूकार से शादी नहीं करनी होगी।
साहूकार व्यापारी के बगीचे में गया और वहाॅ से झुककर दो पत्थर एक थैले में डालकर ले आया।
जब साहूकार पत्थर उठा रहा था तो व्यापारी की बेटी ने देखा कि उसने दोनो काले पत्थर ही उठाये है और उन्हें थैले मे रख दिया है।

साहूकार ने व्यापारी की बेटी से एक पत्थर को थैले से बाहर निकालने के लिये कहा।

 

अब व्यापारी की बेटी के पास तीन विकल्प है जिसमें से उसे चुनना है।
1. पत्थर को थैले से निकालने से मना कर दे।
2. दोनो पत्थर को थैले से निकालकर साहूकार के कपट को उजागर कर दे।
3. सब जानते हुये भी कि थैले में दोनो काले पत्थर है, फिर भी अपने पिता के लिये खुद की खुशियों का त्याग कर दे।

उसने एक पत्थर का थैले से बाहर निकाला और उसे देखने से पहले ही गलती से उसे बगीचे के अन्य बहुत सारे दूसरे पत्थरों के बीच गिरा दिया।
उसने उस साहूकार से कहा

“अरे! मैं भी कितनी लापरवाह हूॅ। लेकिन कोई बात नहीं। यदि आप थैले के बचे हुये पत्थर को देखें तो आप जान जाओगे कि मैने कौन सा पत्थर उठाया था।”

 

बैग में बचा हुआ पत्थर स्पष्ट रूप से काला है और साहूकार यह कभी नहीं चाहेगा की उसका पर्दाफाश हो जाये। उसे इस बात को भी स्वीकार करना पडा कि व्यापारी की बेटी के द्वारा गिराया गया पत्थर सफेद ही था और व्यापारी का पूरा कर्जा साहूकार को माफ करना पडा।

कहानी की प्रेरणाः-

 

थोडा हटकर सोचने से कई बार हमें बुरी परिस्थिती से निकलने में सहायता मिलती है, सिर्फ उन विकल्पों को ही न सोचे जो जिनमें से आपको चुनना है थ्रोआउट आॅफ द बाॅक्स भी सोच सकते है।

 

 

एक किलो घी

 

एक किसान था जो एक दुकानदार को रोज एक किलो घी बेचता था। एक दिन दुकानदार ने सोचा कि जाॅच की जाये कि किसान उसे जो घी देता है वो ठीक वजन का है भी या नहीं। तौलने पर दुकानदार ने देखा कि घी पूरे वजन का नहीं है । इस बात से नाराज होकर वह किसान को अदालत में ले गया।
जज ने किसान से पूछा वह घी का वजन किस वस्तु से करता है। किसान ने जवाब दिया “साहब मैं तो अनपढ हूॅ। मेरे पास कोई उचित तराजू नहीं है नापने का लेकिन मेरे पास एक पैमाना है।”

जज ने पूछा “तब तुम कैसे घी का वजन करते हो?”
तब किसान ने कहा,

“जज साहब जब से दुकानदार ने मुझसे घी खरीदना शुरू किया है तब से ही मैने उससे एक किलो शक्कर खरीदना भी शुरू किया है। हर दिन जब मैं घी लाता हॅू तो उसी शक्कर के समान वजन करके ले आता हॅू। अगर कोई दोषी है तो वह दुकानदार है।”

कहानी की शिक्षाः-

जो आप देते है वही पाते है। दूसरों को धोखा देने की कोशिश न करें।

ये कहानीयां आपको कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताइयेगा।

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