कहानियां जीवन के संघर्ष, क्रोध से हानि और हौंसले की

जीवन के जाने कितने ही महत्वपूर्ण गुण है जो जीवन के लिये आवश्यक है जिनको जीवन में उतारने के लिये कहानियां सहायक साबित हो सकती है। पुराने समय से ही कहानिया हमारे शास्त्रो और ग्रंथो में भी कहानियांे के माध्यम से सीख देने को प्रयास करती आई है।

राह की बाधाः-

बहुत पुरानी बात है। एक राजा ने शहर की एक प्रमुख सडक पर एक बडे पत्थर को देखा। उस पत्थर से उस सडक से आने जाने वाले लोगों को परेशानी हो रही थी।

राजा ने सोचा छुपकर देखा जाये कि इस

सडक से कौन पत्थर को हटाता है। उस सडक से राजा के कई द

रबारी और धनी व्यापारी गुजरे लेकिन उस पत्थर को नजरअंदाज करके गुजर गये।

कई लोगों ने सडको का साफ नहीं रखने के लिये राजा को दोषी ठहराया। लेकिन किसी ने भी पत्थर को रास्ते से हटाने के बारे में कुछ नहीं किया।
तभी वहाॅ से एक किसान अपने सिर पर सब्जीयों की टोकरी रखे हुये वहाॅ से गुजर रहा था। पत्थर के पास

जाने पर उसने अपने टोकरी को साइड में रखकर पत्थर को धकेलने लगा। काफी मेहनत के बाद आखिरकार उसे सफलता मिली।
जब किसान अपने सब्जी की टोकरी लेने वापस मुडा तो उसने देखा कि जहाॅ पत्थर था वहा एक थैली पडी है।

थैली खोलने पर उसने पाया कि उसमें बहुत सारे सोने के सिक्के है साथ ही राजा का लिखा एक कागज का टुकडा था जिसमे लिखा था कि यह सोने के सिक्के उस व्यक्ति के है जिसने रास्ते से पत्थर को हटा दिया है।

कहानी की प्रेरणाः-

जीवन मे आने वाली हर बाधा हमे और बेहतर बनने के लिये मौका देती है

 

 

 

 

तितलीः-

 

एक व्यक्ति को तितली का एक कोकून मिला।
एक दिन उसे कोकून थोडा खुला हुआ दिखाई दिया। वह व्यक्ति कुछ घंटे तितली को उस कोकून से बाहर आने के लिये संघर्ष करता देखने लगा।
अचानक उसने देखा कि कोकून का खुलना रूक गया है और तितली कोकून से बाहर नही निकल पा रही है। तो उस आदमी ने तितली की मदद करने का फैसला लिया। उसने कैंची से कोकून को थोडा ओर खोल दिया। अब तितली उस कोकून से आसानी से बाहर निकल आई। हालांिक उसके पंख दूसरी तितली से छोटे थे ।
उस आदमी ने ये सोचा ही नहीं था कि ऐसा क्यों है।
वह तितली के पंख बडे होने का इंतजार करने लगा। लेकिन ऐसा नही हुआ। उस तितली ने अपना जीवन छोटे पंखो और उडने मे असमर्थ जीव की तरह बिताया।
अपने दयालु मन होने के बावजूद आदमी इस बात को नहीं समझ पाया कि कोकून से निकलने के लिये तितली को जो संघर्ष करना होता है वह उसके पंखो को खुलने में मदद करता है। यह ईश्वरीय व्यवस्था है जिससे तितली का शरिर मजबूत बनता है।

कहानी की प्रेरणाः-

 

जीवन में संघर्ष हमारी ताकत विकसित करते हैं। संघर्ष के बिना हम आगे नहीं बढ सकते, मजबूत नहीं हो सकते। इसलिये हमारे लिये आवश्यक है कि हम अपने दम पर चुनोतियों का सामना करें और दूसरों की मदद का इंतजार न करें।

 

 

 

 

क्रोध से हानि

 

एक लडके का बहुत अधिक गुस्सैल स्वभाव था। एक दिन उसके गुस्से का आभास कराने के लिये उसके पिता ने उसे कीलों से भरा एक थैला उसे दिया। और कहा कि

जब कभी भी लडका गुस्से से अपना आपा खोये उसे हर बार बाड में एक कील ठोकनी है।
पहले दिन लडका हथोडे से 37 कील ठोकता है।

लडका धीरे धीरे अगले कुछ सप्ताह में अपने स्वभाव को नियंत्रित करने लगा। जिससे कीलों की संख्या बाड में कम होने लगी।

उसने पाया कि बाड में कील ठोकने की तुलना में अपने गुस्से को नियंत्रित करना ज्यादा आसान है।
आखिरकार एक दिन ऐसा भी आया कि लडके ने गुस्से से अपना आपा नहीं खोया। उसने अपने पिता को यह बात बताई। उसके पिता ने उसे सुझाव दिया कि जब भी वह अपने गुस्से को नियंत्रित करे वह एक कील जो उसने बाडे में ठोकी है, उसे बाहर निकालेगा।

 

दिन बीतते गये एक दिन उसने अपने पिता के पास आकर कहा कि सारी कीलें बाडे से निकल चुकी है। उसका पिता अपने बेटे का हाथ पकडकर उसे बाडे में ले गया। और कहा,

“तुमने अच्छा काम किया बेटा, लेकिन बाड मे छेद हो गये हैं उन्हे देखो। बाड कभी भी पहले जैसी नहीं होगी। जब तुम किसी से गुस्से में कुछ कहते हो तो वो सामने वाले के दिल में ऐसे ही निशान छोड देते है। ये ऐसा ही है जैसे तुम किसी को चाकू मारते हो और चाकू को बाहर निकालते हो। इससे कोई फर्क नहीं पडता कि तुम कितनी बार कहो कि मुझे दुख है या खेद है लेकिन घाव तो वैसा ही है।”

 

क्हानी से शिक्षाः-

 

अपने गुस्से पर नियंत्रण रखे और गुस्से में किसी से ऐसी बातें न कहें जिससे बाद मे पछताना पडे। जीवन में कुछ चीजों का वापस आना सम्भव नहीं होता है।

 

 

मेंढक

 

मेंढकों का एक समूह जंगल के पास से गुजर रहा था। तभी उस समूह के दो मेंढक एक गहरे गढ्ढे में गिर गये। सारे मेंढको ने चारों ओर से देखा कि गढ्ढा बहुत गहरा है। तब उस समूह सभी मेंढक, गढ्ढे में गिरे मेंढकों से कहते है कि दोस्तों अब कोई आशा नहीं बची है कि तुम यहाॅ से बाहर आ पाओ।
हालांकि उन दोनो मेंढकों ने सभी की बात को नजर अंदाज करने का फैसला किया और वे गढ्ढे से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे।

उनकी कोशिशों को देखने के बावजूद समूह के सभी मेंढक यही कह रहे थे कि अब तुम दोनो को कोशिश छोड देनी चाहिये वे गढ्ढे से कभी भी बाहर नहीं निकल पायेंगे।
आखिरकार दोनो मेंढको में से एक ने दूसरे क्या कह रहे हैं इस पर ध्यान दिया और उसने हार मान ली जिससे उसकी मौत हो गई।

दूसरा मेंढक जितना जोर से कूद सकता था कूदता रहा। फिर से, मेढको ने उससे चिल्लाकर कहा अपने को और तकलीफ मत दो और बस वहीं मर जाओ।
लेकिन वह ओर जोर से कूदा और वह उस गढ्ढे से बाहर आ गया।
जब वह बाहर निकला तो अन्य मेंढकों ने उससे कहा,“क्या तुमने हमारी बात नहीं सुनी थी?”
तब मेढक ने उन्हे समझाया कि वह बहरा है। और पूरे समय वह यही सोच रहा था कि वे सब उसका हौंसला बढा रहे है।

कहानी की प्रेरणाः-

 

लोगो के शब्दों का जीवन में बहुत अधिक प्रभाव होता है। जो भी शब्द मुॅह से निकलते है उस पर सोचना शुरू करें। कई बार ये जीवन और मृत्यु के बीच का अन्तर साबित हो सकता है।

ये कहानीयां आपको कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताइयेगा।

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